Friday, July 25, 2008

खरीदे वोटों से जीती सरकार

कांग्रेस डीलरों की मदद से डील पर आगे बढ़ने को तैयार है। डीलरों की घिनौनी करतूतों ने लोकतंत्र के मंदिर को शर्मशार कर दिया। ये वहीं डीलर हैं जो लगातार कह रहे थे कि उनके संपर्क में बसपा के तीन सांसद है। शाम होते-होते उनके काले कारनामों का जब खुलासा होता है तो देश की जनता के पास इन करतूतों को देखने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।


डीलरों की इन करतूतों से जहां लोकतंत्र शर्मशार हुई वहीं देश मुस्तकबिल बनने के ख्वाब संजोए मायावती की भी रातों की नींद उड़ गई। लेकिन उन लोगों ने मायावती के साथ भाजपा और वाम दलों को एक ऐसा हथियार दे दिया जिसका लोकसभा चुनावों में भरपूर इस्तेमाल होगा।

मायावती जहां अपने वोटरों को यह कहकर लूभाने की कोशिश करेंगी कि कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने दलित की बेटी को देश का मुस्तकबिल बनने से रोक दिया वहीं भाजपा भी इस मुद्दा को भूनाने का पुरजोर प्रयास करेगी।
मध्यप्रदेश, कर्नाटक में सरकार होने के बावजूद भाजपा के सांसदों ने जिस प्रकार सरकार के साथ वोट किया, इसकी सारी कोर कसर भाजपा यह कहकर पूरा करने की कोशिश करेगी कि कांग्रेस ने हमारे सांसदों को खरीदकर अपनी सरकार बचाई है।

वाम दल भी लंबे समय से चाह रहे थे कि सरकार का साथ छोड़े, लेकिन उन्हें मौका हाथ नहीं लग रहा था। करार पर सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उनको लगने लगा था कि इसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है लेकिन जब सरकार विश्वास मत जीत गई तो ऐसा लगा कि उनके हाथ से सबकुछ छूट गया लेकिन भाजपा के कारनामे ने उन्हें भी मौका दे दिया कि जीत तो खरीदे हुए वोटे से हुई है।


कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि महंगाई, बिजली पानी नहीं बल्कि करार और शर्मसार हुई संसद को राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा बनाकर 15वीं लोकसभा पर कब्जा करने की कोशिश करेंगे।

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